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सामवेद

Chapter / Prapathak 3 • Dashati / Sukta 2 • Mantra 8

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 3 • दशती / सूक्त 2 • मन्त्र 8

3.2.8

Mantra ID: 3.2.8

इमा उ त्वा पुरूवसो गिरो वर्धन्तु या मम । पावकवर्णाः शुचयो विपश्चितोऽभि स्तोमैरनूषत ॥ (८)

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सामवेद मन्त्र 3.2.8 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! आप धनवान हैं. हमारी प्रार्थनाएं आप का यश बढ़ाएं. यजमान अग्नि के समान पवित्र, तेजस्वी व विद्वान्‌ हैं. वे प्रार्थनाओं से बारबार आप की स्तुति करते हैं. (८)

EN English Translation

O Indra! You are rich. May our prayers bring you laurels. The host is as holy, radiant and learned as agni. They praise you again and again with prayers. (8)

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