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सामवेद

Chapter / Prapathak 3 • Dashati / Sukta 5 • Mantra 9

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 3 • दशती / सूक्त 5 • मन्त्र 9

3.5.9

Mantra ID: 3.5.9

इन्द्राग्नी अपादियं पूर्वागात्पद्वतीभ्यः । हित्वा शिरो जिह्वया रारपच्चरत्त्रिँशत्पदा न्यक्रमीत् ॥ (९)

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सामवेद मन्त्र 3.5.9 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! हे अग्नि! बिना पैरों वाली उषा पैरों वाली जनता से पहले आ जाती हैं. सिर न होने पर भी जीभ से सब को प्रेरणा देती हुई एक दिन में तीस मुहूर्तो को पार कर जाती हैं. (९)

EN English Translation

O Indra! O agni! Usha with no feet comes before the people with feet. Even if there is no head, inspiring everyone with the tongue, she crosses thirty muhurats in a day. (9)

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