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सामवेद

Chapter / Prapathak 3 • Dashati / Sukta 8 • Mantra 4

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 3 • दशती / सूक्त 8 • मन्त्र 4

3.8.4

Mantra ID: 3.8.4

अयं वां मधुमत्तमः सुतः सोमो दिविष्टिषु । तमश्विना पिबतं तिरो अह्न्यं धत्तँ रत्नानि दाशुषे ॥ (४)

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सामवेद मन्त्र 3.8.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अश्विनीकुमारो! आप के लिए होने वाले यज्ञों में यह मीठा सोमरस तैयार किया गया है. यह सोमरस हम ने एक दिन पहले तैयार किया है. आप इस का सेवन कीजिए. आप हवि देने वाले यजमान को श्रेष्ठ धन प्रदान कीजिए. (४)

EN English Translation

O Ashwinikumaro! This sweet someras has been prepared in the yagyas for you. This somersus we prepared the day before. You consume it. You give the best money to the host who gives the promise. (4)

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