Popular:
सामवेद

Chapter / Prapathak 5 • Dashati / Sukta 2 • Mantra 8

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 5 • दशती / सूक्त 2 • मन्त्र 8

5.2.8

Mantra ID: 5.2.8

पवमानो अजीजनद्दिवश्चित्रं न तन्यतुम् । ज्योतिर्वैश्वानरं बृहत् ॥ (८)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

सामवेद मन्त्र 5.2.8 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

सोम पवित्र हुए. उस के बाद उन्होंने स्वर्गलोक से सब को प्रकाशित कर सकने वाली ज्योति (वैश्वानर) को बिजली की तरह चमकाया. (८)

EN English Translation

Som was holy. After that, he flashed the light (Vaishvanar) that could illuminate everyone from heaven like lightning. (8)

卐 HinduText AI