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सामवेद

Chapter / Prapathak 5 • Dashati / Sukta 3 • Mantra 2

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 5 • दशती / सूक्त 3 • मन्त्र 2

5.3.2

Mantra ID: 5.3.2

पुनानो अक्रमीदभि विश्वा मृधो विचर्षणिः । शुम्भन्ति विप्रं धीतिभिः ॥ (२)

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सामवेद मन्त्र 5.3.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

सोमरस बुद्धि बढ़ाने वाला, पवित्र व सभी शत्रुओं पर आक्रमण करता है. ज्ञानी उस सोम की स्तोत्रों से शोभा बढ़ाते हैं. (२)

EN English Translation

Someras is intelligent, holy and attacks all enemies. Gyani adorns that Soma with stotras. (2)

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