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सामवेद

Chapter / Prapathak 5 • Dashati / Sukta 7 • Mantra 2

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 5 • दशती / सूक्त 7 • मन्त्र 2

5.7.2

Mantra ID: 5.7.2

प्र ते धारा मधुमतीरसृग्रन्वारं यत्पूतो अत्येष्यव्यम् । पवमान पवसे धाम गोनां जनयन्त्सूर्यमपिन्वो अर्कैः ॥ (२)

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सामवेद मन्त्र 5.7.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे सोम! जब आप भेड़ों की ऊन को पार कर के छनते हुए कलश में जाते हैं तब आप की धाराएं आनंद बरसाती हैं. पवित्र हो कर आप तेजस्वी सूर्य देव की तरह चमकने लगते हैं. (२)

EN English Translation

O Mon! When you cross the wool of the sheep and go to the filtering urn, then your streams bring joy. By becoming pure, you start shining like a bright sun god. (2)

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