Popular:
सामवेद

Chapter / Prapathak 5 • Dashati / Sukta 7 • Mantra 7

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 5 • दशती / सूक्त 7 • मन्त्र 7

5.7.7

Mantra ID: 5.7.7

अधि यदस्मिन्वाजिनीव शुभः स्पर्धन्ते धियः सूरे न विशः । अपो वृणानः पवते कवीयन्व्रजं न पशुवर्धनाय मन्म ॥ (७)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

सामवेद मन्त्र 5.7.7 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

सोम को अपने किरण रूपी आभूषणों से सूर्य उसी तरह सजाते हैं, जिस तरह आभूषणों से घोड़े को सजाया जाता है. उसे निकालने में अंगुलियां एकदूसरे से होड़ करती हैं. जैसे ग्वाला गायों को पोसने के लिए गोशाला में ले जाता है, वैसे ही सोमरस को यजमान मटकों में ले जाते हैं. (७)

EN English Translation

The sun decorates Som with its jewels in the same way as the horse is decorated with ornaments. Fingers compete with each other to remove it. Just as a cowherd takes cows to the cowshed to be reared, someras is taken to the host matkas. (7)

卐 HinduText AI