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सामवेद

Chapter / Prapathak 5 • Dashati / Sukta 9 • Mantra 1

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 5 • दशती / सूक्त 9 • मन्त्र 1

5.9.1

Mantra ID: 5.9.1

अभि प्रियाणि पवते चनोहितो नामानि यह्वो अधि येषु वर्धते । आ सूर्यस्य बृहतो बृहन्नधि रथं विष्वञ्चमरुहद्विचक्षणः ॥ (१)

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सामवेद मन्त्र 5.9.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे सोम! आप दिव्य दृष्टि वाले हैं. सूर्य का रथ सब जगह जा सकता है. आप उस रथ पर विराजमान होते हैं और सारे संसार को देखते हैं. आप प्रिय जल में मिलते हैं एवं अन्नों को बढ़ाते हैं. आप व्यापक होते हुए बहते हैं. (१)

EN English Translation

O Mon! You are divinely visible. The chariot of the sun can go everywhere. You sit on that chariot and see the whole world. You meet in the beloved water and increase the grains. You flow wider. (1)

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