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सामवेद

Chapter / Prapathak 6 • Dashati / Sukta 1 • Mantra 5

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 6 • दशती / सूक्त 1 • मन्त्र 5

6.1.5

Mantra ID: 6.1.5

त्वया वयं पवमानेन सोम भरे कृतं वि चिनुयाम शश्वत् । तन्नो मित्रो वरुणो मामहन्तामदितिः सिन्धुः पृथिवी उत द्यौः ॥ (५)

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सामवेद मन्त्र 6.1.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे सोम! आप जग को पवित्र करने वाले हैं. आप की मदद से हम युद्ध में अपना कर्तव्य भलीभांति निबाह सकें. अदिति, मित्र, वरुण, पृथ्वी, सिंधु देवता तथा स्वर्गलोक हमें यशस्वी बनाने की कृपा करें. (५)

EN English Translation

O Mon! You are going to sanctify the world. With your help, we can do our duty well in war. Aditi, Mitra, Varuna, Earth, Sindhu Devta and Heaven, please make us successful. (5)

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