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सामवेद

Chapter / Prapathak 6 • Dashati / Sukta 5 • Mantra 2

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 6 • दशती / सूक्त 5 • मन्त्र 2

6.5.2

Mantra ID: 6.5.2

विभ्राङ्बृहत्पिबतु सोम्यं मध्वायुर्दधद्यज्ञपतावविह्रुतम् । वातजूतो यो अभिरक्षति त्मना प्रजाः पिपर्ति बहुधा वि राजति ॥ (२)

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सामवेद मन्त्र 6.5.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

सूर्य बहुत प्रकाशमान हैं. वे खूब सोमरस पीएं. वे यजमानों को निष्कंटक रखें. उन्हें दीर्घायु करें. वायु सूर्य की किरणों को दूरदूर तक पहुंचाते हैं. उन से वे प्रजा का पालन करते हैं. अनेक प्रकार से प्रकाशित होने में समर्थ होते हैं. (२)

EN English Translation

The sun is very bright. They drink a lot of somerous. They keep the hosts neutral. Make them long. Air transmits the sun's rays far away. From them they follow the subjects. Are able to be published in many ways. (2)

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