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सामवेद

Chapter / Prapathak 6 • Dashati / Sukta 5 • Mantra 8

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 6 • दशती / सूक्त 5 • मन्त्र 8

6.5.8

Mantra ID: 6.5.8

अदृश्रन्नस्य केतवो वि रश्मयो जनाँ अनु । भ्राजन्तो अग्नयो यथा ॥ (८)

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सामवेद मन्त्र 6.5.8 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

जैसे हम जलती हुई अग्नि की ज्वाला देख सकते हैं, वैसे ही सूर्य की प्रकाशित किरणों को हम देख सकते हैं. वे सब को देख सकती हैं. (८)

EN English Translation

Just as we can see the flame of burning agni, so we can see the illuminated rays of the sun. They can see everyone. (8)

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