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सामवेद

Chapter / Prapathak 7 • Dashati / Sukta 1 • Mantra 5

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 7 • दशती / सूक्त 1 • मन्त्र 5

7.1.5

Mantra ID: 7.1.5

हिन्वानो हेतृभिर्हित आ वाजं वाज्यक्रमीत् । सीदन्तो वनुषो यथा ॥ (५)

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सामवेद मन्त्र 7.1.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

जैसे युद्धों में शूरवीर की प्रशंसा होती है व उसे प्रतिष्ठा मिलती है, वैसे ही यज्ञ में सोमरस की यजमान प्रशंसा करते हैं व यज्ञ भूमि में सोम को प्रतिष्ठा मिलती है. (५)

EN English Translation

Just as the knight is praised and gets prestige in wars, in the same way, the host praises Someras in the yajna and Soma gets prestige in the yajna land. (5)

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