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सामवेद

Chapter / Prapathak 7 • Dashati / Sukta 4 • Mantra 2

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 7 • दशती / सूक्त 4 • मन्त्र 2

7.4.2

Mantra ID: 7.4.2

न त्वावाँ अन्यो दिव्यो न पार्थिवो न जातो न जनिष्यते । अश्वायन्तो मघवन्निन्द्र वाजिनो गव्यन्तस्त्वा हवामहे ॥ (२)

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सामवेद मन्त्र 7.4.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! आप धनवान हैं. आप जैसा न कोई स्वर्गलोक और न इस पृथ्वीलोक में हुआ है और न होगा. हम गोधन व धनधान्य के लिए आप की स्तुति करते हैं. (२)

EN English Translation

O Indra! You are rich. No one like you has happened in heaven or earth, nor will it be. We praise you for godhan and wealth. (2)

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