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सामवेद

Chapter / Prapathak 8 • Dashati / Sukta 6 • Mantra 1

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 8 • दशती / सूक्त 6 • मन्त्र 1

8.6.1

Mantra ID: 8.6.1

प्र सोमासो विपश्चितोऽपो नयन्त ऊर्मयः । वनानि महिषा इव ॥ (१)

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सामवेद मन्त्र 8.6.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

सागर की लहरें सागर में जैसे मिल जाती हैं, वैसे सोमरस जल में मिल जाता है. वन में मिले भैंसों की तरह सोमरस जल में एकमेक हो जाता है. (१)

EN English Translation

Just as the waves of the ocean meet in the ocean, somerus is found in the water. Like buffaloes found in the forest, somerus becomes one in the water. (1)

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