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सामवेद

Chapter / Prapathak 8 • Dashati / Sukta 6 • Mantra 4

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 8 • दशती / सूक्त 6 • मन्त्र 4

8.6.4

Mantra ID: 8.6.4

प्र सोम देववीतये सिन्धुर्न पिप्ये अर्णसा । अँशोः पयसा मदिरो न जागृविरच्छा कोशं मधुश्चुतम् ॥ (४)

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सामवेद मन्त्र 8.6.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे सोम! आप को पानी से भरीपूरी नदियों की तरह पानी में मिलाया जाता है. आप मदिर (आनंददायी) व जाग्रत हैं. मधुरता चुआते हुए सोमरस (पात्र में) इकट्ठा होता है. (४)

EN English Translation

O Mon! You are mixed with water like full rivers full of water. You are happy and awake. Someras (in the vessel) gathers, chewing sweetness. (4)

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