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सामवेद

Chapter / Prapathak 8 • Dashati / Sukta 6 • Mantra 5

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 8 • दशती / सूक्त 6 • मन्त्र 5

8.6.5

Mantra ID: 8.6.5

आ हर्यतो अर्जुनो अत्के अव्यत प्रियः सूनुर्न मर्ज्यः । तमीँ हिन्वन्त्यपसो यथा रथं नदीष्वा गभस्त्योः ॥ (५)

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सामवेद मन्त्र 8.6.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

सोमरस को बच्चे की तरह साफसुथरा बना लिया है. प्रिय सोमरस को तेज गति से जल में मिलाया जाता है. वह वैसे ही वेग से पानी में मिलता है, जैसे युद्ध में तेज गति से कोई रथ जाता है. (५)

EN English Translation

Someras has been made clean like a child. Dear Somers is added to water at a fast pace. It gets into the water at the same speed as a chariot in war. (5)

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