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Kena Upanishad 4.1
सा ब्रह्मेति होवाच ब्रह्मणो वा एतद्विजये महीयध्वमिति ततो हैव विदाञ्चकार ब्रह्मेति ॥ १॥
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उपनिषद मन्त्र संख्या 1 का आध्यात्मिक रहस्य