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यजुर्वेद

Adhyaya 23 • Mantra 38

Yajurveda (यजुर्वेद)

यजुर्वेद • अध्याय 23 • मन्त्र 38

23.38

Mantra ID: 23.38

कु॒विद॒ङ्ग यव॑मन्तो॒ यव॑ञ्चि॒द्यथा॒ दान्त्य॑नुपू॒र्वं वि॒यूय॑ । इ॒हेहै॑षां कृणुहि॒ भोज॑नानि॒ ये ब॒र्हिषो॒ नम॑ऽउक्तिं॒ यज॑न्ति ॥ (३८)

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यजुर्वेद मन्त्र 23.38 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे सोम! यवमान यानी जौ से पूरी तरह भरी हुई फसल को हम सब बहुत सोचविचार कर सावधानीपूर्वक काटते हैं. हम दया से परिपूर्ण आप को कुश का आसन भेंट करते हैं. आप यहां आने व भोजन करने की कृपा कीजिए. ये यजमान कुश के आसन पर बैठ कर नमस्कारपूर्वक आप के लिए यज्ञ कर रहे हैं. (३८)

EN English Translation

O Mon! We all cut the crop full of barley very carefully. We offer you the seat of Kush full of mercy. Please come here and eat. These hosts are sitting on the seat of Kush and performing yagna for you with namaskar. (38)

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