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यजुर्वेद

Adhyaya 23 • Mantra 61

Yajurveda (यजुर्वेद)

यजुर्वेद • अध्याय 23 • मन्त्र 61

23.61

Mantra ID: 23.61

पृ॒च्छामि॑ त्वा॒ पर॒मन्तं॑ पृथि॒व्याः पृ॒च्छामि॒ यत्र॒ भुव॑नस्य॒ नाभिः॑ । पृ॒च्छामि॑ त्वा॒ वृष्णो॒ऽअश्व॑स्य॒ रेतः॑ पृ॒च्छामि॑ वा॒चः प॑र॒मं व्यो॑म ॥ (६१)

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यजुर्वेद मन्त्र 23.61 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हम यजमान पृथ्वी के परम अंत से पूछते हैं. हम यजमान लोक की नाभि से पूछते हैं. हम यजमान आप से पूछते हैं कि घोड़ों के वीर्य का बल कौन है. हम यजमान पूछते हैं कि वाणी का परम व्योम क्या है? (६१)

EN English Translation

We ask the ultimate end of the host earth. We ask from the navel of the host folk. We hosts ask you who is the force of horses' semen. We the hosts ask, what is the ultimate meaning of speech? (61)

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