Atharvaveda Quick Jump
Navigate to any Kanda or Mantra
11.2.28
भव॑ राज॒न्यज॑मानाय मृड पशू॒नां हि प॑शु॒पति॑र्ब॒भूथ॑ । यः श्र॒द्दधा॑ति॒ सन्ति॑ दे॒वा इति॒ चतु॑ष्पदे द्वि॒पदे॑ऽस्य मृड ॥ (२८)
HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें
अथर्ववेद मन्त्र 11.2.28 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
हे सब के स्वामी भव! यजमान को सुखी बनाओ. हे गाय, अश्व आदि पशुओं के पालको! जो मनुष्य ऐसी श्रद्धा करता है कि इंद्र आदि देव मेरे रक्षक हैं, उस मनुष्य की संतान और पशुओं की रक्षा करो. (२८)
EN English Translation
O Swami of all! Make the host happy. O cow, horse, etc., raise animals! The person who believes in such a way that Indra adi dev is my protector, protect the children and animals of that man. (28)