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11.7.26
तानि॒ कल्प॑द् ब्रह्मचा॒री स॑लि॒लस्य॑ पृ॒ष्ठे तपो॑ऽतिष्ठत्त॒प्यमा॑नः समु॒द्रे । स स्ना॒तो ब॒भ्रुः पि॑ङ्ग॒लः पृ॑थि॒व्यां ब॒हु रो॑चते ॥ (२६)
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अथर्ववेद मन्त्र 11.7.26 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
ब्रह्मचारी उन अन्न आदि को उत्पन्न करता हुआ, जल के ऊपर तपस्या करता हुआ सागर पर वर्तमान रहता है. स्नान से पवित्र हुआ एवं कबरे रंग के साथ पीले रंग का होता हुआ पृथ्वी पर अधिक दीप्त होता है. अर्थात् अधिक चमकता है (२६)
EN English Translation
Brahmachari, producing those grains etc., doing penance on water, remains present on the ocean. Bathing purifies and turns yellow with kabre color and is more bright on the earth. That is, shines more (26)