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अथर्ववेद

Kanda 12 • Sukta 1 • Mantra 31

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 12 • सूक्त 1 • मन्त्र 31

12.1.31

Mantra ID: 12.1.31

यास्ते॒ प्राचीः॑ प्र॒दिशो॒ या उदी॑ची॒र्यास्ते॑ भूमे अध॒राद्याश्च॑ प॒श्चात् । स्यो॒नास्ता मह्यं॒ चर॑ते भवन्तु॒ मा नि प॑प्तं॒ भुव॑ने शिश्रिया॒णः ॥ (३१)

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अथर्ववेद मन्त्र 12.1.31 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे पृथ्वी! तुम्हारी पूर्व, उत्तर, दक्षिण और पश्चिम रूप चारों दिशाएं मुझे विचरण की शक्ति प्रदान करें. इस लोक में रहता हुआ मैं गिरने न पाऊं. (३१)

EN English Translation

O earth! May your east, north, south and west directions give me the power of rotation. I can't fall while living in this world. (31)

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