Atharvaveda Quick Jump
Navigate to any Kanda or Mantra
12.2.34
अ॑पा॒वृत्य॒ गार्ह॑पत्यात्क्र॒व्यादा॒ प्रेत॑ दक्षि॒णा । प्रि॒यं पि॒तृभ्य॑ आ॒त्मने॑ ब्र॒ह्मभ्यः॑ कृणुता प्रि॒यम् ॥ (३४)
HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें
अथर्ववेद मन्त्र 12.2.34 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
हे प्राणियो! मंत्रों के द्वारा इस गार्हपत्य अग्नि से दूर हटो तथा क्रव्याद अग्नि से दक्षिण दिशा को जाओ. वहां तुम्हारे लिए और पितरों के लिए जो प्रिय हो, वही कार्य करो. (३४)
EN English Translation
O creatures! Move away from this agni of garbage through mantras and go to the south direction from kravyad agni. Do what is dear to you and your ancestors there. (34)