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12.2.4
यद्य॒ग्निः क्र॒व्याद्यदि॒ वा व्या॒घ्र इ॒मं गो॒ष्ठं प्र॑वि॒वेशान्यो॑काः । तं माषा॑ज्यं कृ॒त्वा प्र हि॑णोमि दू॒रं स ग॑च्छत्वप्सु॒षदोऽप्य॒ग्नीन् ॥ (४)
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अथर्ववेद मन्त्र 12.2.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
यदि क्रव्याद अग्नि ने अथवा व्याघ्र ने हमारे गोष्ठ में प्रवेश किया है तो मैं उसे माष अर्थात् उरद आज्य द्वारा दूर करता हूं. (४)
EN English Translation
If Kravyad Agni or Tiger has entered our seminar, Then I remove it by Mash i.e. Urad Ajya. (4)