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अथर्ववेद

Kanda 12 • Sukta 2 • Mantra 5

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 12 • सूक्त 2 • मन्त्र 5

12.2.5

Mantra ID: 12.2.5

यत्त्वा॑ क्रु॒द्धाः प्र॑च॒क्रुर्म॒न्युना॒ पुरु॑षे मृ॒ते । सु॒कल्प॑मग्ने॒ तत्त्वया॒ पुन॒स्त्वोद्दी॑पयामसि ॥ (५)

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अथर्ववेद मन्त्र 12.2.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

पुरुष की मृत्यु के कारण क्रोधित हुए प्राणियों ने तुम्हें प्रदीप्त किया. वह कार्य पूर्ण हो गया, इसीलिए हम ने तुम्हें तुम से ही प्रदीप्त किया है. (५)

EN English Translation

The creatures who were angry due to the death of the man illuminated you. That work has been completed, that is why we have illuminated you from you. (5)

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