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12.3.26
आ य॑न्ति दि॒वः पृ॑थि॒वीं स॑चन्ते॒ भूम्याः॑ सचन्ते॒ अध्य॒न्तरि॑क्षम् । शु॒द्धाः स॒तीस्ता उ॑ शुम्भन्त ए॒व ता नः॑ स्व॒र्गम॒भि लो॒कं न॑यन्तु ॥ (२६)
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अथर्ववेद मन्त्र 12.3.26 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
आकाश से आने वाले ये जल पृथ्वी की सेवा करते हैं तथा पृथ्वी से पुनः आकाश में पहुंचते हैं. ये पवित्र जल पवित्रता देने वाले हैं. ये जल हम को स्वर्ग की प्राप्ति कराएं. (२६)
EN English Translation
These waters coming from the sky serve the earth and reach the sky again from the earth. These holy waters are pure. May this water bring us to heaven. (26)