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अथर्ववेद

Kanda 12 • Sukta 3 • Mantra 43

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 12 • सूक्त 3 • मन्त्र 43

12.3.43

Mantra ID: 12.3.43

अ॒ग्नी रक्ष॑स्तपतु॒ यद्विदे॑वं क्र॒व्यात्पि॑शा॒च इ॒ह मा प्र पा॑स्त । नु॒दाम॑ एन॒मप॑ रुध्मो अ॒स्मदा॑दि॒त्या ए॑न॒मङ्गि॑रसः सचन्ताम् ॥ (४३)

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अथर्ववेद मन्त्र 12.3.43 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

जो राक्षस मेरे कर्म फल में बाधा पहुंचाते हैं. ये अग्नि देव उन्हें बाधित करें अर्थात्‌ रोके. क्रव्याद और पिशाच हमारा शोषण न करें. इस राक्षस को यहां आने से रोकते हुए हम भागते हैं. आंगिरस और सूर्य इस राक्षस को वश में करें. (४३)

EN English Translation

The demons who obstruct my karma fruit. May this agni god interrupt them, that is, stop them. Don't let kravyad and vampires exploit us. We run away, preventing this monster from coming here. Control this monster, Angirus and the Sun. (43)

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