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अथर्ववेद

Kanda 12 • Sukta 4 • Mantra 51

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 12 • सूक्त 4 • मन्त्र 51

12.4.51

Mantra ID: 12.4.51

ये व॒शाया॒ अदा॑नाय॒ वद॑न्ति परिरा॒पिणः॑ । इन्द्र॑स्य म॒न्यवे॑ जा॒ल्मा आ वृ॑श्चन्ते॒ अचि॑त्त्या ॥ (५१)

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अथर्ववेद मन्त्र 12.4.51 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

जो लोग वशा का दान न करने का परामर्श देते हैं, वे मूर्ख लोग इंद्र के कोप के कारण स्वयं नष्ट हो जाते हैं. (५१)

EN English Translation

Those who advise not to donate Vasha, those foolish people themselves are destroyed due to Indra's wrath. (51)

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