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अथर्ववेद

Kanda 12 • Sukta 4 • Mantra 52

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 12 • सूक्त 4 • मन्त्र 52

12.4.52

Mantra ID: 12.4.52

ये गोप॑तिं परा॒णीया॑था॒हुर्मा द॑दा॒ इति॑ । रु॒द्रस्या॑स्तां ते हे॒तिं परि॑ य॒न्त्यचि॑त्त्या ॥ (५२)

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अथर्ववेद मन्त्र 12.4.52 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

जो लोग वशा गौ के स्वामी से उस का दान न करने के लिए कहते हैं, वे मूर्ख इंद्र के आयुध वज्र के लक्ष्य बनते हैं. (५२)

EN English Translation

Those who ask the swami of Vasha Gau not to donate it become the target of fool Indra's Armament Vajra. (52)

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