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अथर्ववेद

Kanda 13 • Sukta 1 • Mantra 54

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 13 • सूक्त 1 • मन्त्र 54

13.1.54

Mantra ID: 13.1.54

गी॒र्भिरू॒र्ध्वान्क॑ल्पयि॒त्वा रोहि॑तो॒ भूमि॑मब्रवीत् । त्वयी॒दं सर्वं॑ जायतां॒ यद्भू॒तं यच्च॑ भा॒व्यम् ॥ (५४)

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अथर्ववेद मन्त्र 13.1.54 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

रोहित ने पृथ्वी को स्तुतियों से उन्नत करते हुए उस से कहा कि भूत और भविष्य जो कुछ हों, वे तुम से ही उत्पन्न हों. (५४)

EN English Translation

Rohita elevated the earth with praises and told him that whatever the past and future may be, they should arise from you. (54)

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