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13.1.55
स य॒ज्ञः प्र॑थ॒मो भू॒तो भव्यो॑ अजायत । तस्मा॑द्ध जज्ञ इ॒दं सर्वं॒ यत्किं चे॒दं वि॒रोच॑ते॒ रोहि॑तेन॒ ऋषि॒णाभृ॑तम् ॥ (५५)
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अथर्ववेद मन्त्र 13.1.55 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
यज्ञ की उत्पत्ति पहले भूत और भविष्यत के रूप में ही हुई. जो कुछ भी रोचमान है, वह सब पृथ्वी से ही प्रकट हुआ था. रोहित ने उसे पुष्ट किया. (५५)
EN English Translation
Yajna first originated as a ghost and future. All that Rochman is, it was revealed from the earth. Rohit confirmed it. (55)