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अथर्ववेद

Kanda 13 • Sukta 2 • Mantra 14

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 13 • सूक्त 2 • मन्त्र 14

13.2.14

Mantra ID: 13.2.14

यत्स॑मु॒द्रमनु॑ श्रि॒तं तत्सि॑षासति॒ सूर्यः॑ । अध्वा॑स्य॒ वित॑तो म॒हान्पूर्व॒श्चाप॑रश्च॒ यः ॥ (१४)

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अथर्ववेद मन्त्र 13.2.14 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

समुद्र में जो भी रत्न आदि हैं उन्हें सूर्य देव प्राप्त करते हैं. सूर्य का पूर्व से पश्चिम तक का मार्ग विशाल है. (१४)

EN English Translation

All the gems etc. in the sea are received by the Sun God. The sun's path from east to west is vast. (14)

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