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अथर्ववेद

Kanda 13 • Sukta 2 • Mantra 15

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 13 • सूक्त 2 • मन्त्र 15

13.2.15

Mantra ID: 13.2.15

तं समा॑प्नोति जू॒तिभि॒स्ततो॒ नाप॑ चिकित्सति । तेना॒मृत॑स्य भ॒क्षं दे॒वानां॒ नाव॑ रुन्धते ॥ (१५)

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अथर्ववेद मन्त्र 13.2.15 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे सूर्य देव! तुम शीघ्र चलने वाले अश्वो की सहायता से उस मार्ग को शीघ्र प्राप्त कर लेते हो. तुम अपना मन इधरउधर नहीं होने देते, इस कारण तुम को अमृत अन्न का भाग नियमित रूप से प्राप्त होता है. (१५)

EN English Translation

O Sun God! You get that path quickly with the help of a fast-moving horse. You do not allow your mind to go around, because of this, you get the share of nectar food regularly. (15)

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