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अथर्ववेद

Kanda 14 • Sukta 1 • Mantra 29

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 14 • सूक्त 1 • मन्त्र 29

14.1.29

Mantra ID: 14.1.29

तृ॒ष्टमे॒तत्कटु॑कमपा॒ष्ठव॑द्वि॒षव॒न्नैतदत्त॑वे । सू॒र्यां यो ब्र॒ह्मा वेद॒ सइद्वाधू॑यमर्हति ॥ (२९)

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अथर्ववेद मन्त्र 14.1.29 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

यह अन्न प्यास उत्पन्न करने वाला तथा कड़वा है. यह अन्न घृणित तथा विषैला है. यह खाने योग्य नहीं है. जो ब्राह्मण सूर्या को इस प्रकार की शिक्षा देता है, वह निश्चित रूप से वधू संबंधी वस्त्र लेने योग्य है. (२९)

EN English Translation

This food is thirsty and bitter. This food is disgusting and poisonous. It is not edible. The Brahmin who teaches Surya this kind of education is definitely eligible to take bride-related clothes. (29)

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