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15.6.3
भूमे॑श्च॒ वैसो॒ऽग्नेश्चौष॑धीनां च॒ वन॒स्पती॑नां च वानस्प॒त्यानां॑ च॑ वी॒रुधां॑ चप्रि॒यं धाम॑ भवति॒ य ए॒वं वेद॑ ॥ (३)
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अथर्ववेद मन्त्र 15.6.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
जो इस बात को जानता है, वह पृथ्वी, अग्नि, ओषधि एवं वनस्पतियों का प्रिय होता है. (३)
EN English Translation
He who knows this is dear to earth, agni, medicine and vegetation. (3)