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अथर्ववेद

Kanda 18 • Sukta 1 • Mantra 12

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 18 • सूक्त 1 • मन्त्र 12

18.1.12

Mantra ID: 18.1.12

किंभ्राता॑स॒द्यद॑ना॒थं भवा॑ति॒ किमु॒ स्वसा॒ यन्निरृ॑तिर्नि॒गच्छा॑त् । काम॑मूताब॒ह्वे॒तद्र॑पामि त॒न्वा॑ मे त॒न्वं सं पि॑पृग्धि ॥ (१२)

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अथर्ववेद मन्त्र 18.1.12 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

यमी-वह भाई कैसा है, जिस के विद्यमान रहते हुए उस की बहन अपनी चाही हुई कामना से हीन रह जाए. वह कैसी बहन है, जिस के सामने ही उस का भाई काम संतप्त हो. इसी कारण तुम मेरी इच्छा के अनुसार आचरण करो. (१२)

EN English Translation

Yami- What is the brother whose presence, his sister should be inferior to her desired desire? What kind of sister is she, in front of whom her brother's work is angry. That is why you behave according to my will. (12)

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