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अथर्ववेद

Kanda 18 • Sukta 1 • Mantra 13

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 18 • सूक्त 1 • मन्त्र 13

18.1.13

Mantra ID: 18.1.13

न ते॑ ना॒थंय॒म्यत्रा॒हम॑स्मि॒ न ते॑ त॒नूं त॒न्वा॒ सम्प॑पृच्याम् । अ॒न्येन॒ मत्प्र॒मुदः॑कल्पयस्व॒ न ते॒ भ्राता॑ सुभगे वष्ट्ये॒तत् ॥ (१३)

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अथर्ववेद मन्त्र 18.1.13 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

यम-हे यमी! मैं तेरी इस कामना को पूर्ण करने वाला नहीं हो सकता. मैं तेरी देह को स्पर्श नहीं कर सकता. इसलिए तू अब मुझे छोड़ कर किसी अन्य पुरुष से इस प्रकार का संबंध स्थापित कर. मैं तुझे पत्नी बनाने की कामना नहीं करता हूं. (१३)

EN English Translation

Yama- O Yummy! I cannot be going to fulfill this wish of yours. I can't touch your body. So you should now establish this kind of relationship with another man except me. I don't wish to make you a wife. (13)

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