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अथर्ववेद

Kanda 18 • Sukta 1 • Mantra 15

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 18 • सूक्त 1 • मन्त्र 15

18.1.15

Mantra ID: 18.1.15

ब॒तो ब॑तासि यम॒नैव ते॒ मनो॒ हृद॑यं चाविदा॒म । अ॒न्या किल॒ त्वां क॒क्ष्येव यु॒क्तं परि॑ष्वजातौ॒ लिबु॑जेव वृ॒क्षम् ॥ (१५)

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अथर्ववेद मन्त्र 18.1.15 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

यमी-हे यम! तेरी दुर्बलता पर मैं दुखी हूं. तेरा मन मुझ में नहीं लगा है. मैं अभी तक तेरे मन को नहीं समझ सकी. तू किसी अन्य स्त्री से संबंधित होगा. (१५)

EN English Translation

Yami- O Yama! I am saddened by your weakness. Your mind is not in me. I still can't understand your mind. You will belong to another woman. (15)

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