Atharvaveda Quick Jump
Navigate to any Kanda or Mantra
18.1.16
अ॒न्यमू॒ षुय॑म्य॒न्य उ॒ त्वां परि॑ ष्वजातै॒ लिबु॑जेव वृ॒क्षम् । तस्य॑ वा॒ त्वं मन॑ इच्छा॒स वा॒ तवाधा॑ कृणुष्व संविदं॒ सुभ॑द्राम् ॥ (१६)
HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें
अथर्ववेद मन्त्र 18.1.16 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
यम-हे यमी! रस्सी जिस प्रकार घोड़े से मिलती है, बेल जैसे पेड़ से लिपट जाती है, उसी प्रकार तू किसी अन्य पुरुष से मिल. तुम दोनों परस्पर अनुकूल मन वाले बनो. इस के बाद तू अत्यधिक कल्याण वाले पुत्र को प्राप्त कर. (१६)
EN English Translation
Yum- Oh yeah! Just as a rope meets a horse, is wrapped in a vine-like tree, so you meet another man. Both of you should be mutually friendly. After this, you will receive a son of great welfare. (16)