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अथर्ववेद

Kanda 18 • Sukta 2 • Mantra 12

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 18 • सूक्त 2 • मन्त्र 12

18.2.12

Mantra ID: 18.2.12

यौ ते॒ श्वानौ॑यम रक्षि॒तारौ॑ चतुर॒क्षौ प॑थि॒षदी॑ नृ॒चक्ष॑सा । ताभ्यां॑ राज॒न्परि॑ धेह्येनंस्व॒स्त्यस्मा अनमी॒वं च॑ धेहि ॥ (१२)

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अथर्ववेद मन्त्र 18.2.12 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे पितरों के प्रभु! पितर मार्ग में स्थित चार नेत्रों वाले जो कुत्ते यमपुर की रक्षा करने के हेतु तुम्हारे द्वारा नियुक्त किए गए हैं, इस प्रेत की रक्षा के लिए उन्हें सौंप दो. यह तुम्हारे लोक में रहने को आया है. इसे बाधा रहित स्थान दो. (१२)

EN English Translation

O Swami of fathers! Hand over the four-eyed dogs located in pitar marg, which have been appointed by you to protect Yampur, to protect this ghost. It has come to live in your world. Give it a barrier-free space. (12)

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