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अथर्ववेद

Kanda 18 • Sukta 2 • Mantra 29

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 18 • सूक्त 2 • मन्त्र 29

18.2.29

Mantra ID: 18.2.29

सं वि॑शन्त्वि॒हपि॒तरः॒ स्वा नः॑ स्यो॒नं कृ॒ण्वन्तः॑ प्रति॒रन्त॒ आयुः॑ । तेभ्यः॑ शकेम ह॒विषा॒नक्ष॑माणा॒ ज्योग्जीव॑न्तः श॒रदः॑ पुरू॒चीः ॥ (२९)

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अथर्ववेद मन्त्र 18.2.29 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हमारे गोत्र में उत्पन्न पिता, पितामह आदि सभी पितर भलीभांति यज्ञ में आ कर बैठे तथा हमें सुखी बनाएं. वे हमारी आयु की वृद्धि करें. हम भी आयु प्राप्त कर के हवियों द्वारा पितरों को पूजते हुए चिरकाल तक जीवित रहें. (२९)

EN English Translation

All the ancestors born in our gotra, father, etc. sat in the yagna well and make us happy. They increase our age. We should also attain age and live forever by worshiping the ancestors by the havis. (29)

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