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अथर्ववेद

Kanda 18 • Sukta 2 • Mantra 30

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 18 • सूक्त 2 • मन्त्र 30

18.2.30

Mantra ID: 18.2.30

यां ते॑ धे॒नुंनि॑पृ॒णामि॒ यमु॑ ते क्षी॒र ओ॑द॒नम् । तेना॒ जन॑स्यासो भ॒र्ता योऽत्रास॒दजी॑वनः ॥ (३०)

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अथर्ववेद मन्त्र 18.2.30 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे प्रेत! मैं तेरे निमित्त गोदान करता हूं. मैं तेरे लिए दूध से बना जो भात देता हूं, उस के द्वारा तू यमलोक में अपने जीवन को पुष्ट करने वाला हो. (३०)

EN English Translation

O ghost! I donate for you. You are going to strengthen your life in Yamlok through the rice I give you made of milk. (30)

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