Popular:
अथर्ववेद

Kanda 18 • Sukta 2 • Mantra 54

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 18 • सूक्त 2 • मन्त्र 54

18.2.54

Mantra ID: 18.2.54

पू॒षात्वे॒तश्च्या॑वयतु॒ प्र वि॒द्वानन॑ष्टपशु॒र्भुव॑नस्य गो॒पाः । स त्वै॒तेभ्यः॒परि॑ ददत्पि॒तृभ्यो॒ऽग्निर्दे॒वेभ्यः॑ सुविद॒त्रिये॑भ्यः ॥ (५४)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

अथर्ववेद मन्त्र 18.2.54 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे प्रेत! पशुओं की हिंसा न करने वाले पशुपालक पूषा तुझे यहां से उस स्थानों से ले जाएं. प्राणियों की रक्षा करने वाले ये दोनों तुझे पितरों को अर्पण करें. अग्नि देव तुझे ऐश्वर्य वाले देवताओं को सौंपें. (५४)

EN English Translation

O ghost! Pusha, a cattle herder who does not commit animal violence, should take you from here to those places. Offer these two, who protect the creatures, to your ancestors. May agni dev hand you over to the gods of opulence. (54)

卐 HinduText AI