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अथर्ववेद

Kanda 18 • Sukta 3 • Mantra 19

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 18 • सूक्त 3 • मन्त्र 19

18.3.19

Mantra ID: 18.3.19

यद्वो॑ मु॒द्रंपि॑तरः सो॒म्यं च॒ तेनो॑ सचध्वं॒ स्वय॑शसो॒ हि भू॒त । ते अ॑र्वाणः कवय॒ आ शृ॑णोतसुवि॒दत्रा॑ वि॒दथे॑ हू॒यमा॑नाः ॥ (१९)

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अथर्ववेद मन्त्र 18.3.19 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे पितरो! तुम अपने सोमरूपी धन के सहित हम से मिलो, क्योंकि तुम अपने यज्ञ के कारण यशस्वी हो. तुम हमें हमारा अभीष्ट प्रदान करो और बुलाए जाने पर हमारे आह्वान को सुनो. (१९)

EN English Translation

O father! Meet us with your soma-like wealth, because you are successful because of your sacrifice. You give us our will and listen to our call when called. (19)

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