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अथर्ववेद

Kanda 18 • Sukta 4 • Mantra 43

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 18 • सूक्त 4 • मन्त्र 43

18.4.43

Mantra ID: 18.4.43

यास्ते॑ धा॒नाअ॑नुकि॒रामि॑ ति॒लमि॑श्राः स्व॒धाव॑तीः । तास्ते॑ सन्तू॒द्भ्वीःप्र॒भ्वीस्तास्ते॑ य॒मो राजानु॑ मन्यताम् ॥ (४३)

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अथर्ववेद मन्त्र 18.4.43 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे प्रेत! ये काले तिलों से मिश्रित तथा स्वधा से पूर्ण खीलें परलोक की प्राप्ति पर तुझे विस्तृत रूप में प्राप्त हों. यमराज तुझे इन को खाने की अनुमति दें. (४३)

EN English Translation

O ghost! May you get these black sesame seeds mixed with black sesame seeds and full of swadha in detail when you attain the hereafter. Yamraj, allow you to eat them. (43)

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