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अथर्ववेद

Kanda 19 • Sukta 23 • Mantra 30

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 19 • सूक्त 23 • मन्त्र 30

19.23.30

Mantra ID: 19.23.30

ब्रह्म॑ज्येष्ठा॒ संभृ॑ता वी॒र्याणि॒ ब्रह्माग्रे॒ ज्येष्ठं॒ दिव॒मा त॑तान । भू॒तानां॑ ब्र॒ह्मा प्र॑थ॒मोत ज॑ज्ञे॒ तेना॑र्हति॒ ब्रह्म॑णा॒ स्पर्धि॑तुं॒ कः ॥ (३०)

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अथर्ववेद मन्त्र 19.23.30 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

ब्रह्मा जिन ऋषियों में ज्येष्ठ अर्थात्‌ बड़े हैं. उन ऋषियों ने जो वीर कर्म किए. सब में यही श्रेष्ठ है, इस दृष्टि से सृष्टि के आदि में ब्रह्मा ने द्युलोक अर्थात स्वर्ग का विस्तार किया. ब्रह्मा सभी प्राणियों से पहले उत्पन्न हुए. उन ब्रह्मा से कौन देव तथा मनुष्य स्पर्धा कर सकता है. (३०)

EN English Translation

Brahma is the eldest of the sages. The heroic deeds that those sages did. This is the best of all, in this sense, in the beginning of creation, Brahma expanded the duloka i.e. heaven. Brahma was born before all beings. Which god and man can compete with those Brahmas? (30)

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