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अथर्ववेद

Kanda 20 • Sukta 128 • Mantra 3

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 20 • सूक्त 128 • मन्त्र 3

20.128.3

Mantra ID: 20.128.3

यद्भ॒द्रस्य॒ पुरु॑षस्य पु॒त्रो भ॑वति दाधृ॒षिः । तद्वि॒प्रो अब्र॑वीदु॒ तद्ग॑न्ध॒र्वः काम्यं॒ वचः॑ ॥ (३)

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अथर्ववेद मन्त्र 20.128.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

जिस ब्राह्मण का पुत्र धारण करने वाला होता है. वह ब्राह्मण अभीष्ट वचन करने में समर्थ है. ऐसा गंधर्व कहते हैं. (३)

EN English Translation

The Brahmin whose son is going to be assumed. That Brahmin is capable of making desired promises. This is what Gandharva says. (3)

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