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20.25.4
आदङ्गि॑राः प्रथ॒मं द॑धिरे॒ वय॑ इ॒द्धाग्न॑यः॒ शम्या॒ ये सु॑कृ॒त्यया॑ । सर्वं॑ प॒णेः सम॑विन्दन्त॒ भोज॑न॒मश्वा॑वन्तं॒ गोम॑न्त॒मा प॒शुं नरः॑ ॥ (४)
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अथर्ववेद मन्त्र 20.25.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
हे इंद्र! जब पणियों ने गायों का अपहरण कर लिया, तब अंगिरागोत्री ऋषियों ने सब से पहले तुम्हारे निमित्त ही हवि अन्न का संपादन किया. हमें जो भीषण भय प्राप्त है, उसे इंद्र हम से दूर करते हैं. वे इंद्र सदैव अपने उत्तम कर्मो से आहवनीय अग्नि को प्रदीप्त करते हैं. देवों के नेता इंद्र ने पणियों से छीना हुआ धन गी, अश्व, भेड़, बकरी आदि से प्राप्त किया था. (४)
EN English Translation
O Indra! When the Panis kidnapped the cows, the Angiragotri sages first edited the food for you. Indra removes the terrible fear we have from us. That Indra always illuminates the agni of the call with his best deeds. Indra, the leader of the devas, had received the money snatched from the panis from gi, horse, sheep, goat etc. (4)