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अथर्ववेद

Kanda 20 • Sukta 26 • Mantra 4

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 20 • सूक्त 26 • मन्त्र 4

20.26.4

Mantra ID: 20.26.4

यु॒ञ्जन्ति॑ ब्र॒ध्नम॑रु॒षं चर॑न्तं॒ परि॑ त॒स्थुषः॑ । रोच॑न्ते रोच॒ना दि॒वि ॥ (४)

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अथर्ववेद मन्त्र 20.26.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

इंद्र के विशाल, देदीप्यमान तथा विचरणशील रथ में हरि नाम के अश्च जुड़े रहते हैं. वे अश्व आकाश में दमकते रहते हैं. (४)

EN English Translation

In the huge, radiant and moving chariot of Indra, there are tears named Hari. Those horses shine in the sky. (4)

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