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अथर्ववेद

Kanda 20 • Sukta 26 • Mantra 5

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 20 • सूक्त 26 • मन्त्र 5

20.26.5

Mantra ID: 20.26.5

यु॒ञ्जन्त्य॑स्य॒ काम्या॒ हरी॒ विप॑क्षसा॒ रथे॑ । शोणा॑ धृ॒ष्णू नृ॒वाह॑सा ॥ (५)

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अथर्ववेद मन्त्र 20.26.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

इंद्र के सारथी उन के रथ में घोड़ों को जोड़ते हैं. वे घोड़े रथ के दोनों ओर रहते हैं. वे अश्व कामना करने योग्य एवं इंद्र को वहन करने वाले हैं. (५)

EN English Translation

Indra's charioteers add horses to his chariot. They live on either side of the horse chariot. They are able to wish horses and carry Indra. (5)

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